

एक बार तीन पंडित रस्ते से जा रहे थे | तभी उन्हें कुछ पैरों के निशान मिले | पहले युवक ने कहा किसी भैंस के पैरों के निशान है दूसरे युवक ने कहा भैंस एक पाठे को जन्म देने वाली होगी तीसरे युवक ने कहा भैंसे ने अभी एक पाठे को जन्म दिया हैं | अपनी बात की सचाई ढूंढ़ने के लिए उन्होंने उसका पीछा किया पीछा करने के बाद उन्हें एक भैंस और एक पाठा मिला वह बहुत खुश थे |
| परन्तु वह भैंस राजा की थी जो तीन दिनों से गायब थी राजा के सिपाई उसे ढूंढ़ रहे थे | जब उन्होंने पंडितो को भैंस के साथ देखा तो उन्हें लगा यही भैंस चोर हे| वह भैस के साथ पंडितों को भी ले गए| राज दरबार पहुँच कर उनहोने भैंस को खूटे से बांध दिया और पंडितो को राजा के सामने भैंस चोरो के रूप में पेश किया| राजा ने बिना कुछ पूछताछ के उन्हें काल कोठरी में बंद कर दिया|












तीनो युवक परेशान थे | एक युवक जिसका नाम यदु था बोला "नहीं ऐसा नहीं हो सकता" दूसरा युवक दिमान बोला "ऐसा होता तो वह खाता"तीसरा युवक खुंडेश्वर बोला " तो क्या उसने नहीं खाया हैं " तीनो पंडित बार बार यही दुहराने लगे पहरी ने ये बातें सुनी उसे कुछ नहींसमझ आया उसने राजा को बताया सुबह राजा ने तीनो पंडितो को राज दरबार बुलाया फिर राजा ने पंडितो से कहा "तुम तीनो कालकोठरी में एक दूसरे से क्या कह रहे थे" साफ साफ बताना वरना मृत्युदंड की सज़ा मिलेगी तीनो पंडितो को पता चल गया था की राजा बिना सोचे -विचारे काम करने वाला व्यक्ति है |

उन्होंने सोचा हम ऐसे भी मरेंगे और वैसे भी मरेंगे | तो चलो सारी बात साफ़ साफ़ कहदे|
यदु बोला "महाराज मैंने कहा था ऐसा नहीं हो सकता" कहने का अर्थ है की हम तीनो सोच रहे थे की इस देश के राजा बैल है पर मैंने कहा "ऐसा नहीं हो सकता”| फिर दिमान बोला मैंने कहा की "ऐसा होता तो वह घास खाता "इस पर खंडेश्वर बोला "तो क्या उसने घास नहीं खाई "| राजा को इस बात पर अचरज हुआ वह बोला "तुम्हे मैं बैल क्यों लगा " इस पर वह तीनो बोले "महाराज हम तो वहा से जा रहे थे हमे पैरों के निशान मिले जिन्हे देख कर हमने कुछ अंदाजा लगाया उसी की प्रमाणता देखने हम भैंसे के पीछे गए जहाँ से आपके सैनिक हमे पकड़ लाये औरआपने भी हमारी बात सुने बिना हमे सज़ा दे दी |अब जो राजा बिना बात के सजा दे वह तो बैल ही होगा|राजा को बहुत शर्मिंदगी हुई |

राजा ने अपनी गलती मानी|राजा ने उन्हें आज़ाद कर दिया
और अपना सभासद भी बना दिया |
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